लामा-फेरा

“लामा” अर्थात् सदगुरू और उसके द्वारा जीवन से मृत्यु का सफर, स्वस्थ, निरोगी, बिना तनाव, आंतरिक एवं बाह्य विचारों के अत्याधिक दबाव से मुक्त जीवन प्राप्त करते हुए तय करने की प्रक्रिया है।

इसमें बौद्ध दर्शन एवं प्रतीक चिन्हों के रूप में अघोर तंत्र के महावज्रयान से प्राप्त शालविक मंत्र रहस्य को उपयोग किया गया है। ढाई चक्कर एवं बारह प्रतीक चिन्हों की इस आद्वितीय विधि से डिप्रेशन, वैचारिक, मत-भेद, भूत-प्रेत, टोना-टोटका, शक एवं घरेलू समस्याओं का निदान किया जा सकता है।

 

मृत्यु के अन्तिम पड़ाव पर दुखों कष्टों से मुक्ति, आत्माओं की मुक्ति के लिये सबसे कारगर एवं तेज प्रणाली है।

असाध्य रोगो में निराशा को दूर करने की प्रभावशाली इस प्रक्रिया को कोई भी व्यक्ति आसानी से एक दिन की कार्यशाला में सीख सकता है।

इस तकनीक को दूर बैठकर भी सीखा जा सकता है तथा दूर बैठे व्यक्ति का उपचार करने के साथ-साथ घर, मकान, दूकान फैक्ट्री आदि का उपचार भी किया जा सकता है।