Guru Purnima special
 On this day, from Guru Shishav Yatra, the journey of the temple to Tadupantar, where Guru leads towards vast spiritual practice, there is also the evidence of giving his knowledge to God, who is deprived of this sadhana, in his knowledge It is no longer sure to grow, although the tools of all the gurus are confidential, it does not even have news of their disciples, but today I will definitely describe it so that the world can know On the day of Guru Purnima, how and in what form is the effect of Guru’s grace, although the ordinary person can understand the fruit easily, but only he should be relieved of suffering, the sadhana of infancy has been called as austerity. There are five types of meditation in them. By doing these five practices, one can approach God, and the person can be felt by touching in his soul, but the master is capable of saying even more or less than that, that the entire childhood period can be called Guru Ishwar Keeping on, this day, with the energy of Vyas, the full guru encourages his disciples and shows the path ahead by making the disciple successful throughout the year.
गुरु पूर्णिमा विशेष-:
इस दिन गुरु शैशव काल से तदनुपन्तर का यात्रा जहां गुरु  को विराट गहन साधना की ओर ले जाती है, वही उनके ज्ञान को आलोकिता  देने का प्रमाण भी है, जो व्यक्ति इस साधना से वंचित रह जाता है, उसके  ज्ञान में वृद्धि होना निश्चित नहीं रह जाता, हालांकि यह सभी गुरु की साधनाएं गोपनीय होती हैं,, इसकी खबर उनके शिष्यों को भी नहीं होती, परंतु आज इसका वर्णन अवश्य करूंगी ताकि जग जान सके कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के सन्नध्य का फल किस प्रकार और किस रूप में प्राप्त होता है, हालांकि सामान्य व्यक्ति फल को आसानी से समझ पाता परंतु उससे तो बस दुखों से राहत चाहिए, शैशव काल की साधना को अतिन्द्रिय साधना कहा गया है। इन में पांच प्रकार की साधनाये है प्रतिदिन होतीं है। इन पांच साधनाओं को करने से ईश्वर के समीप जा सकता है, और उसकी भाँति को अपने आत्मा में स्पर्श के द्वारा महसूस किया जा सकता है परंतु गुरु तो सक्षम है कि इससे भी ज्यादा करीब या फिरयूं कहे कि पूर्ण शैशव काल गुरु ईश्वर को अपने में धारण किये रहाता है, इस दिन व्यास उर्जा से पूर्ण गुरु अपने शिष्यों को ऊर्जान्वित कर शिष्य को वर्ष भर की साधना को सफल कर आगे का मार्ग दिखाते हैं