Scholar mantra mystery

This is a wonderful astrological system of symbols produced by 4,50,000 mantras, given by Maharishi Shalvik. In this system, 300 sets of symbols are used in three sets of symbols and due to all the problems in the life of every creature born in the world And suggestions are received by it.

It is treated with Mahamrityunjaya mantra by the time calculation results chart used in it. It was made by Sad-guru Sheree Satyanand ji (Mr. S. K. Saini Ji) after seeing the impression of two and a half million thumbs in nearly eight years. There is absolutely the exact system in itself, its basic basis is the calculation of the current state of the brain.

for learning :-

To learn this, the revered Guru Mother can be learned by presenting herself in a two-day workshop by the great Lord Teeswari Nanda Ji. The most important is the Shaktipat process. It is a different matter to learn the calculation but the Mahamantunjaya mantra is used to treat it. For him, ‘Tanna Hari Prasodya’

Which changes the mechanism of this mantra in a row according to the order of time, Shaktipat is very essential in conventional conviction for this capacity so that the guru can communicate with the motive of this Mahamantra.

शालविक मंत्र रहस्य

यह महर्षि शालविक द्वारा प्रदत 4,50,000 मंत्र द्वारा निर्मित प्रतीक चिन्हों की अद्भुत ज्योतिष प्रणाली है I इस प्रणाली में कुल 300 प्रतीक चिन्हों का तीन सेट में प्रयोग किया जाता है और संसार में पैदा हुए हर प्राणी के जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं के कारण एवं सुझाव इससे प्राप्त हो जाते हैं I
इसी में प्रयुक्त होने वाले काल गणना परिणाम चार्ट द्वारा महामृत्युंजय मंत्र से उपचार किया जाता है I सद्गुरू श्री सत्यानंद जी (श्री एस. के. सैनी जी) द्वारा इसे लगभग 8 वर्षों में ढाई लाख अंगूठो की छाप देखकर उनके आधार पर बनाया गया I दुनिया में बिल्कुल अपने आप में सटीक प्रणाली है इसका मूल आधार मस्तिष्क की वर्तमान स्थिति की गणना है I
सीखने के लिए :-
इसे सीखने के लिए पूज्य गुरु माँ तपेश्वरी नन्दा जी द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला में स्वयं उपस्थित होकर सीखा जा सकता है I सबसे महत्वपूर्ण इसमें शक्तिपात प्रक्रिया है I गणना सीखना अलग बात है परंतु इसके द्वारा उपचार करने के लिए जिस महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग किया जाता है उसके लिए ‘ तन्नो हरि प्रचोद्यात ‘
जो इस मंत्र की कार्य प्रणाली को क्रमबद्व काल के अनुसार एक पंक्ति में बदलता है इसी क्षमता के लिए शक्तिपात परम्परागत दीक्षांत रूप में अत्यंत आवश्यक है ताकि गुरु इस महामंत्र का शक्तिपात द्वारा संचार कर सके I