संस्कृत भाषा में लिंग का अर्थ है चिन्ह और इसी अर्थ  में यह शिव लिंग के लिए प्रयुक्त होता है । शिवलिंग का अर्थ है शिव का परम पुरुष का प्रकृति के साथ समिन्वत चिन्ह है ।

त्रिगुण को जो अव्यक्तावस्था है जिसके त्रिगुण उत्त्पन्न हुआ है, उसी  में लींन हो जाता है । सारे संसार के उस उपादान का कारण  का जो अन्नत हैं, उसे लिंग कहते हैं। इसी से सम्पूर्ण संसार उत्त्पन्न होता हैं । भगवन शिव स्वयं ज्योर्तिलिंग स्वरुप तामस से परे स्थित  हैं ।लिंग और वेदो के समायोग से वे अर्धनारीश्वर होते हैं । भिन्न – भिन्न पदार्थो के बने शिवलिंग का लाभ ।

* मिश्री से बनाये हुए शिवलिंग की पूजा से रोग आदि से छुटकारा मिलता हैं ।

* तीनो का अाटा सामान भाग में गूंथ कर जो शिवलिंग पूजा जाता है ( गेहू, चावल, जौ, आटा लें ) इससे  जातक को संतान, लक्ष्मी और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है ।

* किसी से प्रेम प्यार बढ़ाने के लिए गुड़ की भेली में शिवलिंग बनाकर उस ब्यक्ति का संकल्प और ध्यान करने से विशेष लाभ मिलता है ।

*यदि चीनी की चंशनी को जमा कर शिवलिंग बनाकर पूजा की जाए तो सुख शांति की प्राप्ति होती हैं ।

*यदि किसी को वंश – व्रृद्धि में बाँधा आ रही हो तो वह जातक बांस के अंकुर को शिवलिंग के समान काटकर पूजा करें तो लाभ होगा ।

* आंवले  को पीसकर बनाया गया शिवलिंग मुक्ति प्रदाता होता है।(आंवले के सीजन में 108 दिन लगातार शिवलिंग बनाकर   पूजा करें मुक्ति पाओगे )
* स्फटिक  तथा अन्य रत्नो के बने शिवलिंगो जातको की अभीष्ट कामनाएं पूरी करता हैं ।
* शत्रुओं के नाश के लिए लहसुनिया के बने शिवलिंग की पूजा करने से विजय मिलती है ।
* पीपल का शिवलिंग गरीबी का निवारण करता है । वीरवार से पूजा शुरू करें ।
* चाँदी का शिवलिंग धन-धान बढ़ाता हैं ।सोमवार से पूजा करें ।
* सोने से बना शिवलिंग समृद्धि का वर्धन करता है ।
* यदि स्त्रियां मोती के शिवलिंग का पूजन करें तो भाग्य -व्रृद्धि  होती हैं ।
* यदि जिस जातक की पत्रिका में अकाल मृत्त्यु का भय हो तो वह दूर्वा को शिवलिंग गुथकर उसकी आराधना करें तो विशेष        लाभ होता हैं ।
*गायत्री मंत्र का सवा लाख  आहुति का यज्ञ करके उस भस्म से शिवलिंग बनाकर पूजा की जाए तो जातक की अभिलाष बहुत शीघ्र पूर्ण होती हैं ।
* वशीकरण के लिए सोंठ,मिर्च, पीपल के चूर्ण को सेंधा नमक के साथ गूथकर शिवलिंग की पूजा करने पर लाभ मिलता हैं ।     चंदन और कस्तूरी व गोलोचन के साथ गजमुक्त को मिलाकर जो शिवलिंग की पूजा करेंगे तो वशीकरण, सम्मोहन आकर्षण   के साथ शिव-साम्राज्य की भी प्राप्ति होती हैं ।
* दही को बांधकर निचोड़ देने के बाद उससे जो शिवलिंग बन जाए उसकी पूजा करने से लक्ष्मी, सुख व काम सुख की प्राप्ति       मिलेगी ।

*असली पारद से बने शिवलिंग की शास्त्रों में बहुत प्रशंसा की गई हैं । इस शिवलिंग को शास्त्रों में ज्योर्तिलिंग से भी बहुत श्रेष्ठ माना गया हैं । इसका पूजन कामना पूर्ति,समस्त पापो का नाश करता हैं ।यह जातक को जीवन के संम्पूर्ण सुख एवं मोक्षप्रद शिव स्वरुप प्रदान करता हैं ।पारद शिव लिंग गारंटी देने वाले से ही ले आजकल लैड के ऊपर पालिश आ जाती है । नकली पारद शिवलिंग की पूजा से कोई लाभ नहीं होता हैं ।

शिव पूजन के लिए निम्न बातों पर विशेष ध्यान  दिया जाए तो पूजा का फल कई गुणा ज्यादा मिलता हैं ।

१-.भगवन शिवजी की में तिल का प्रयोग नहीं होता और चंपा के फूल भी नहीं चढाए जाते ।
२.शिवजी की पूजा में भी दूर्वा ,तुलसीदल चढाए जाते हैं इसमें संदेह नहीं किया जाना चाहिए ।
३. शिवजी की पूजा में बेल पत्र प्रधान है और नील कमल सर्वश्रेठ पुष्प माना गया हैं ।बेल पत्र चढाते समय बेल पत्र का चिकना      भाग मूर्ति की ओर रखना चाहिए ।
४.जितने अधिक बेल पत्रों को चढ़ाया जाए,उतना ही उत्तम होता हैं, खंडित बेल पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए ।
५. पूजन (अनुष्ठान )भस्म त्रिपुंड और रुद्राक्ष माला जातक के शरीर पर जरूर होनी चाहिए ।
६. शिव जी की परिक्रमा में सम्पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती । चढ़ें हुए जल वाली नाली का उल्लंघन नहीं करना चाहिए । वहीं से      परिक्रमा उलटी की जाती हैं “