योगमाया एवं सरोपा

” योगमाया ” लामा फेरा की द्वितीय प्रक्रिया यानि ध्यान की गहन प्रक्रिया में ‘ध्यान की गहराई’ में जाकर दूसरे व्यक्ति में मानसिक तरंगो के जरिये संबंध स्थापित कर संदेश भेजना, ग्राफिक चित्र भेजना, ठीक उसी प्रकार मोबाइल का प्रयोग किया जाता है I बस अंतर इतना है कि यहां वयक्ति शब्दों, आकृतियों में ग्रहण करता है I योग माया ध्यान क्रिया में सुक्षम रूप से मस्तिष्क ग्रहण करता है हालांकि इसका पता रोगी को नहीं होता स्वयं मस्तिष्क उन्ही तरंगों के अनुरूप प्रतिक्रिया करता है परिणाम स्वरुप रोग समाप्त होता है I 1. इस प्रक्रिया द्वारा रोगी के रोग को अपने ऊपर लेकर वातावरण में विलीन किया जाता है I 2. इस प्रक्रिया द्वारा ध्यान की गहन अवस्था, सम्प्रेषण,समाधि की प्राप्ति आसान है I 3. विचारों में ठहराव, रिश्तों के प्रति तटस्थ्ता और दूरी बनाने (Detachment) की प्रक्रिया आसानी से इसके द्वारा सम्पन की जा सकती है I
‘ सरोपा ‘ लेजर बीम तकनीक कही जाती है I इसमें स्फटिक द्वारा प्राण ऊर्जा लेजर बीम के रूप में ‘ वुड़पल्प ‘ के साथ प्रयोग कर शरीर के नस्ट कोषों को पुनजीर्वित करने की क्रिया तो सम्पन कराई जा सकती है साथ ही ‘ रोलिंग , बीमिंग एवं ग्रेडिंग ‘ विधि के द्वारा टयूमर, सायटिका, सरवाईकल, जोड़ों के दर्द आदि का उपचार आसानी से किया जा सकता है I